अक्षय तृतीया: अक्षय पुण्य और समृद्धि का पावन दिन
धर्ममय शुरुआत, दान और दीर्घकालिक मंगल के लिए विशेष शुभ अवसर
तारीख
2027-05-09
अक्षय तृतीया सूर्योदय मुहूर्त
5:57 AM
मुहूर्त समय
अक्षय तृतीया सूर्योदय मुहूर्त
शुरुआत समय: 5:57 AM
आपके शहर के लिए वैशाख शुक्ल तृतीया में सूर्योदय से मुख्य पूजन काल आरंभ माना जाता है।
तिथि समय
तृतीया आरंभ
11:43 AM on May 08, 2027
तृतीया समाप्ति
09:03 AM on May 09, 2027
पंचांग और चौघड़िया देखें
अक्षय तृतीया क्या है?
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है और इसे अक्षय पुण्य तथा अक्षय समृद्धि का दिन माना जाता है।
इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, तथा कई परंपराओं में परशुराम जयंती का भी स्मरण किया जाता है।
इस दिन घर-परिवार पूजा, दान और शुभ आरंभ जैसे बचत, संकल्प और दीर्घकालिक योजनाओं से उत्सव मनाते हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अक्षय तृतीया को सात्त्विक और धर्ममय कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
शास्त्रीय परंपराओं में इस तिथि को दान, जप, व्रत और सेवा से विशेष पुण्य प्राप्ति का दिन बताया गया है।
सांस्कृतिक रूप से यह दिन संयमित समृद्धि, कृतज्ञता और मूल्य आधारित जीवन-योजना की प्रेरणा देता है।
विधि और परंपराएं
- प्रातः स्नान करके विष्णु-लक्ष्मी पूजन हेतु स्वच्छ पूजास्थल तैयार करें।
- तुलसी, फूल, चंदन, फल और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
- मुख्य संकल्प और पूजा सूर्योदय मुहूर्त में करें।
- अन्न दान, जल दान, वस्त्र दान और जरूरतमंदों की सेवा का संकल्प लें।
- कई परिवार इस दिन दीर्घकालिक बचत, निवेश या नए कार्य की शुरुआत करते हैं।
- विष्णु सहस्रनाम, गीता श्लोक या पारिवारिक कथा-पाठ करें।
- अंत में प्रसाद वितरण और विनम्रता सहित समृद्धि की प्रार्थना करें।
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और दीपक व कलश सहित वेदी सजाएं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान कर संकल्प लें।
अक्षत, पुष्प, तुलसी, धूप और फल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
परिवार परंपरा अनुसार विष्णु-लक्ष्मी स्तोत्र या मंत्र जप करें।
सूर्योदय मुहूर्त में आरती कर धर्मयुक्त समृद्धि की प्रार्थना करें।
अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य में अन्न, जल, अन्नाज या वस्त्र का दान करें।
प्रसाद बांटकर कृतज्ञता और मंगलकामना के साथ पूजा पूर्ण करें।
पारंपरिक अर्पण
अक्षय तृतीया में प्रचलित अर्पण और पालन:
- विष्णु-लक्ष्मी पूजन के लिए तुलसी और पुष्प
- फल, मिश्री और सात्त्विक प्रसाद
- दान हेतु चावल, अन्न और जल
- जरूरतमंदों को वस्त्र और आवश्यक सामग्री
- सूर्योदय पूजन में घी का दीपक और धूप
- धर्म, स्थिरता और समृद्धि के लिए पारिवारिक प्रार्थना