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    पारंपरिक वैदिक ज्योतिष सिद्धांतों का पालन

    © 2026 मुहूर्तम्. सर्वाधिकार सुरक्षित।

    जन्म तिथि कैलकुलेटर

    अपनी जन्म तिथि, उसके अधिदेवता, शास्त्रीय पूजन विधि और आगामी तिथि जन्मदिन की तारीखें जानें।

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    तिथि दिन या रात में किसी भी समय बदल सकती है। जन्म का सटीक समय या निकटतम अनुमानित समय दर्ज करें (सटीक समय न होने पर परिणाम को अनुमानित मानें)।

    आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान का उपयोग केवल इस गणना के लिए होता है। इन्हें किसी प्रोफ़ाइल में सहेजा नहीं जाता और न ही आपसे जोड़ा जाता है।

    आपकी जन्म तिथि के अधिदेवता और शास्त्रोक्त पूजा

    धर्मशास्त्रों में प्रत्येक तिथि के एक निश्चित अधिदेवता (तिथि-नित्य देवता) बताए गए हैं। नीचे दी गई सूची में अपनी तिथि पर क्लिक करके उसके अधिदेवता, उपयुक्त पूजन, मंत्र, शुभ दान और शास्त्र सम्मत नियम देखें। अपनी जन्म तिथि की गणना करने पर आपकी संबंधित तिथि स्वतः खुल जाएगी।

    सभी 16 तिथियों के अधिदेवता और पूजा देखें
    प्रतिपदाअधिदेवता: अग्नि देव

    अधिदेवता: अग्नि देव — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • प्रातःकाल घी का दीपक जलाएं और भोजन करने से पूर्व दिन की प्रथम आहुति अग्नि को अर्पित करें। — निर्णयसिन्धु
    • इस तिथि पर हवन अथवा होम करना विशेष रूप से उपयुक्त है। — कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता)

    शुभ दान: घी, तिल अथवा हवन में उपयोग होने वाली सामग्री का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    द्वितीयाअधिदेवता: ब्रह्मा जी

    अधिदेवता: ब्रह्मा जी — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • इस तिथि पर अध्ययन, अध्यापन और नई विद्या का शुभारंभ करना अनुकूल माना जाता है। — मुहूर्तचिन्तामणि
    • सफेद पुष्प अर्पित करें और एकाग्रता के साथ गायत्री मंत्र का जप करें। — विष्णुधर्मोत्तर पुराण

    शुभ दान: पुस्तकें, लेखन सामग्री अथवा किसी विद्यार्थी की सहायता। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    तृतीयाअधिदेवता: माता गौरी (पार्वती)

    अधिदेवता: माता गौरी (पार्वती) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • लाल पुष्प, हल्दी और कुमकुम से माता गौरी की पूजा करें। — निर्णयसिन्धु
    • अपने परिवार की स्त्रियों, विशेष रूप से अपनी माता का सम्मान करें। — भविष्य पुराण

    शुभ दान: हल्दी, कुमकुम, चूड़ियां अथवा वस्त्र का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    चतुर्थीअधिदेवता: भगवान श्री गणेश

    अधिदेवता: भगवान श्री गणेश — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • दिन के अन्य अनुष्ठानों से पूर्व भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित कर पूजा करें। — निर्णयसिन्धु
    • यदि यह आपकी परंपरा का हिस्सा हो, तो चंद्रोदय तक संकष्टी व्रत का पालन कर सकते हैं। — धर्मसिन्धु (चतुर्थी पर उपवास की पद्धति क्षेत्रीय रूप से भिन्न होती है; चंद्रोदय के बाद पारण का स्वरूप सर्वाधिक प्रचलित है।)

    मंत्र: ओं गं गणपतये नमः — गरुड़ पुराण

    शुभ दान: मोदक, तिल के लड्डू अथवा दूर्वा का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल चतुर्थी विनायक चतुर्थी है, जिसकी पूजा मध्याह्न (दोपहर) में की जाती है। कृष्ण चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी है, जिसमें चंद्र दर्शन के उपरांत व्रत खोला जाता है।

    पंचमीअधिदेवता: नाग देवता

    अधिदेवता: नाग देवता — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • नाग मंदिर में दूध अर्पित करें। जीवित सर्प को दूध न पिलाएं। — गरुड़ पुराण
    • यदि आपके परिवार में कुल परंपरा से नाग पूजा की रीति हो, तो उसका पालन करें। — धर्मसिन्धु (कुल-विशेष नाग पूजा की विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार व्यापक रूप से भिन्न होती है।)

    शुभ दान: दूध अथवा पशुओं की देखभाल हेतु सहायता का दान। — धर्मसिन्धु

    शास्त्र सम्मत सावधानियां / वर्जित कर्म

    • नाग पंचमी के दिन भूमि की खुदाई करने से बचना परंपरागत नियम है। — भविष्य पुराण

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    षष्ठीअधिदेवता: भगवान कार्तिकेय (स्कंद)

    अधिदेवता: भगवान कार्तिकेय (स्कंद) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • भगवान कार्तिकेय की पूजा करें, विशेष रूप से बच्चों के कल्याण की प्रार्थना के साथ। — निर्णयसिन्धु
    • लाल पुष्प अर्पित करना और दोपहर तक अन्न का त्याग करना सामान्य आचरण है। — धर्मसिन्धु

    शुभ दान: लाल वस्त्र, गुड़ अथवा बच्चों के लिए भोजन का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    सप्तमीअधिदेवता: भगवान सूर्य

    अधिदेवता: भगवान सूर्य — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का पाठ करें। — निर्णयसिन्धु
    • प्रातः सूर्य की ओर मुख करके नियमित प्रार्थना करना इस तिथि से जुड़ा मुख्य जीवनव्रत है। — भविष्य पुराण

    मंत्र: ओं घृणिः सूर्य आदित्यः — भविष्य पुराण

    शुभ दान: गेहूं, गुड़, तांबा अथवा लाल वस्त्र का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    अष्टमीअधिदेवता: भगवान रुद्र (शिव)

    अधिदेवता: भगवान रुद्र (शिव) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि; निर्णयसिन्धु (कुछ परंपराओं में रुद्र के स्थान पर मातृकाओं अथवा दुर्गा को अष्टमी से जोड़ा जाता है।)

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • रुद्राभिषेक करें; इस परंपरा में रुद्र को अष्टमी का अधिदेवता माना गया है। — शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता
    • शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करें और श्रीरुद्रम् का पाठ करें। — कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता), काण्ड 4.5 (नमकम्), 4.7 (चमकम्)

    मंत्र: ओं नमः शिवाय — शिव पुराण

    शुभ दान: काले तिल, वस्त्र अथवा शिव मंदिर में अर्पित भोजन का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: नवरात्रि के महीनों में शुक्ल अष्टमी मां दुर्गा की पूजा से भी घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। कृष्ण अष्टमी कालाष्टमी है, जिसमें रात्रि जागरण और भैरव की पूजा की जाती है।

    नवमीअधिदेवता: मां दुर्गा

    अधिदेवता: मां दुर्गा — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • दुर्गा सप्तशती, अथवा संक्षिप्त अर्गला व कीलक स्तोत्र का पाठ करें। — निर्णयसिन्धु
    • कन्या पूजन करें तथा कन्याओं को भोजन, फल अथवा वस्त्र अर्पित करें। — धर्मसिन्धु

    शुभ दान: कन्याओं के लिए भोजन, वस्त्र या फल, अथवा दुर्गा मंदिर में अर्पण। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    दशमीअधिदेवता: यमराज (धर्मराज)

    अधिदेवता: यमराज (धर्मराज) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि; मुहूर्तचिन्तामणि (कुछ निबंध ग्रंथों में धर्मराज नाम भी दिया गया है।)

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • अपने दायित्वों, ऋणों और अधूरे वचनों को पूरा करने का सचेत प्रयास करें। — गरुड़ पुराण
    • वाणी और आचरण में सत्य तथा संयम का अभ्यास करें। — धर्मसिन्धु

    शुभ दान: पितरों के लिए काले तिल और जल से तर्पण, अथवा जरूरतमंदों को भोजन का दान। — गरुड़ पुराण

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    एकादशीअधिदेवता: भगवान विष्णु

    अधिदेवता: भगवान विष्णु — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • अन्न और दालों से परहेज करते हुए उपवास रखें और तुलसी पत्र से भगवान विष्णु की पूजा करें। — निर्णयसिन्धु; गरुड़ पुराण
    • यदि पूर्ण उपवास रख रहे हों, तो द्वादशी पर निर्धारित समय में ही व्रत का पारण करें। — धर्मसिन्धु

    मंत्र: ओं नमो भगवते वासुदेवाय — गरुड़ पुराण

    शुभ दान: द्वादशी के पारण पर किसी जरूरतमंद को दिया जाने वाला भोजन, वस्त्र अथवा फल। — धर्मसिन्धु

    शास्त्र सम्मत सावधानियां / वर्जित कर्म

    • एकादशी के दिन अन्न, विशेष रूप से चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित है। — गरुड़ पुराण

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल एकादशी व्रत का व्यापक रूप से प्रचलित स्वरूप है। कृष्ण एकादशी का भी समान शास्त्रीय माहात्म्य है, यद्यपि स्मार्त और वैष्णव नियमों में पारण समय भिन्न हो सकता है।

    द्वादशीअधिदेवता: भगवान विष्णु

    अधिदेवता: भगवान विष्णु — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि; विष्णुधर्मोत्तर पुराण (कुछ सूचियों में सविता नाम दिया गया है।)

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • एकादशी व्रत का पारण निर्धारित समय सीमा के भीतर करें। — निर्णयसिन्धु
    • स्वयं भोजन ग्रहण करने से पूर्व किसी अतिथि, संन्यासी या जरूरतमंद को भोजन कराएं। — धर्मसिन्धु

    शुभ दान: किसी अतिथि, संन्यासी या भूखे व्यक्ति को सात्विक भोजन का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    त्रयोदशीअधिदेवता: कामदेव (प्रदोष में भगवान शिव)

    अधिदेवता: कामदेव (प्रदोष में भगवान शिव) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि; धर्मसिन्धु (इस तिथि पर व्यापक रूप से शिव की पूजा की जाती है, क्योंकि त्रयोदशी प्रदोष की तिथि है।)

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • संध्या समय (गोधूलि बेला) में भगवान शिव की प्रदोष पूजा करें। — शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता
    • प्रदोष काल के दौरान शिवलिंग पर जल और बिल्वपत्र अर्पित करें। — शिव पुराण

    शुभ दान: शिव मंदिर में घी के दीपक, बिल्वपत्र अथवा सफेद वस्त्र का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: शुक्ल पक्ष में यह तिथि वृद्धि और नई शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कृष्ण पक्ष में जप, दान और अधूरे कार्यों को पूर्ण करने पर अधिक बल दिया जाता है।

    चतुर्दशीअधिदेवता: भगवान शिव

    अधिदेवता: भगवान शिव — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि; निर्णयसिन्धु (कृष्ण चतुर्दशी का संबंध काली और भैरव से भी है।)

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • भगवान शिव की पूजा करें, विशेष रूप से कृष्ण चतुर्दशी के निशीथ काल (मध्यरात्रि) में। — शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता
    • पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) अथवा शिव सहस्रनाम का जप करें। — कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता), काण्ड 4.5 (नमकम्), 4.7 (चमकम्)

    शुभ दान: भोजन, तिल अथवा किसी शिव मंदिर हेतु सहायता का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: भाद्रपद मास में शुक्ल चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी है, जिसे भगवान विष्णु की पूजा के साथ मनाया जाता है। कृष्ण चतुर्दशी मास शिवरात्रि है, जिसे रात्रि जागरण और शिव पूजा के साथ मनाया जाता है।

    पूर्णिमाअधिदेवता: चंद्र देव (सोम)

    अधिदेवता: चंद्र देव (सोम) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • सत्यनारायण पूजा करें अथवा अपने परिवार के साथ सत्यनारायण कथा का पाठ करें। — भविष्य पुराण
    • पूर्ण चंद्रमा के उदय होने तक उपवास रखें, फिर चंद्र देव को अर्घ्य दें। — धर्मसिन्धु
    • नदी अथवा किसी तीर्थ में प्रातःकालीन स्नान भी एक पारंपरिक अनुष्ठान है। — गरुड़ पुराण

    शुभ दान: श्वेत वस्तुएं: चावल, दूध, चीनी, चांदी अथवा सफेद वस्त्र का दान। — धर्मसिन्धु

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की पराकाष्ठा है, जो सत्यनारायण व्रत और दान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा केवल शुक्ल पक्ष में होती है; इसके समानांतर कृष्ण पक्ष का पर्व अमावस्या है।

    अमावस्याअधिदेवता: पितृगण (पूर्वज)

    अधिदेवता: पितृगण (पूर्वज) — निर्णयसिन्धु; धर्मसिन्धु; मुहूर्तचिन्तामणि

    सुझाई गई पूजा और धार्मिक आचरण

    • अपने पितरों के निमित्त तर्पण (जल और तिल) अर्पित करें। — गरुड़ पुराण
    • अपने परिवार की मासिक अथवा वार्षिक श्राद्ध परंपरा का पालन करें। — धर्मसिन्धु
    • ब्राह्मणों, जरूरतमंदों, गायों अथवा कौओं को भोजन अर्पित करें। — गरुड़ पुराण

    शुभ दान: काले तिल, पका हुआ भोजन, अन्न अथवा भूखे लोगों की सहायता का दान। — गरुड़ पुराण

    शास्त्र सम्मत सावधानियां / वर्जित कर्म

    • नए कार्यों का आरंभ परंपरागत रूप से अमावस्या के पश्चात किया जाता है। — मुहूर्तचिन्तामणि (अमावस्या उन अनुष्ठानों के लिए शुभ है जिनके लिए यह विशेष रूप से निर्धारित है, जैसे श्राद्ध और दिवाली लक्ष्मी पूजा।)

    पक्ष के अनुसार विशेष विचार: अमावस्या केवल कृष्ण पक्ष में होती है; इसके समानांतर शुक्ल पक्ष का पर्व पूर्णिमा है। कृष्ण अमावस्या चंद्र मास की सबसे अंधकारमय रात्रि है, जो नए सांसारिक कार्यों के बजाय पितृ कर्म और दान के लिए निर्धारित है।

    जन्म तिथि क्या होती है?

    जन्म के समय जो चंद्र तिथि गतिमान थी, वही आपकी 'जन्म तिथि' कहलाती है। वैदिक ज्योतिष में यह सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर (प्रत्येक 12 अंश) पर आधारित होती है।

    एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं—शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा) की 15 तिथियां और कृष्ण पक्ष (घटते चंद्रमा) की 15 तिथियां।

    अंग्रेजी तारीख की तरह तिथि आधी रात को नहीं बदलती, बल्कि दिन या रात के किसी भी समय प्रारंभ और समाप्त हो सकती है। इसी कारण एक ही अंग्रेजी तारीख को जन्मे दो व्यक्तियों की जन्म तिथि भिन्न हो सकती है।

    यह जन्म तिथि कैलकुलेटर कैसे काम करता है?

    यह कैलकुलेटर आपकी जन्म तारीख, सही समय और जन्म स्थान के अक्षांश-देशांतर के आधार पर उस सटीक क्षण में सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति की गणना करता है।

    गणना के उपरांत आपको अपनी जन्म तिथि, पक्ष, चंद्र मास (अमांत व पूर्णिमांत), तथा तिथि के प्रारंभ व समाप्ति का सटीक समय प्राप्त होता है। साथ ही उस समय का नक्षत्र और वैदिक वार भी दर्शित होता है।

    हिंदू चंद्र वर्ष और अंग्रेजी सौर वर्ष की गणना पद्धति अलग होने के कारण प्रतिवर्ष आपका तिथि जन्मदिन अंग्रेजी कैलेंडर की अलग तारीख पर पड़ता है। यह कैलकुलेटर आने वाले वर्षों की तिथियां स्वतः निकाल देता है।

    तिथि जन्मदिन कैसे मनाएं?

    जन्म तिथि (तिथ्युत्सव) मनाने की परंपराएं हर कुल और क्षेत्र में भिन्न हो सकती हैं। सामान्यतः इस दिन प्रातः स्नान कर दीप प्रज्वलित करना, मंदिर जाना, माता-पिता व गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना तथा यथाशक्ति दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    कई परिवारों में इस दिन रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप, आयुष सूक्त का पाठ अथवा अपने कुलदेवता व इष्टदेव की विशेष पूजा की जाती है। यदि कोई बड़ा अनुष्ठान संभव न हो, तो भी श्रद्धा व सात्विकता के साथ किया गया छोटा सा पूजन भी पूर्ण फलदायी होता है।

    यदि आपके कुल या संप्रदाय की कोई विशिष्ट रीति हो, तो सदैव उसे ही सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विधिवत संकल्प अथवा विशेष अनुष्ठान के लिए आप अपने कुल पुरोहित या किसी योग्य पंडित का मार्गदर्शन ले सकते हैं।

    जन्म तिथि पर रुद्राभिषेक

    पारंपरिक अभिषेक द्रव्य, उनका धार्मिक फल, पूजा क्रम, महामृत्युंजय मंत्र और प्रमाणित शास्त्रीय स्रोत हमारी विस्तृत मार्गदर्शिका में पढ़ें।

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    शास्त्रीय संदर्भ और स्रोत

    यहाँ दी गई समस्त धार्मिक जानकारी धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, मुहूर्तचिन्तामणि और शिव पुराण जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर संकलित की गई है। केवल उन्हीं संदर्भों में अध्याय व श्लोक संख्या दी गई है, जिन्हें मूल ग्रंथों से सत्यापित किया गया है।

    विभिन्न संहिताओं, क्षेत्रीय परंपराओं और संप्रदायों में अधिदेवताओं अथवा विधियों में कुछ भेद मिल सकता है। जहाँ ऐसा मतभेद है, वहाँ उसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। आपकी कुल परंपरा और पारिवारिक रीति हमेशा सर्वोपरि है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    मेरी जन्म तिथि क्या है और इसका क्या महत्व है?

    आपके जन्म के सटीक समय और स्थान पर आकाश में जो हिंदू चंद्र तिथि गतिमान थी, वही आपकी जन्म तिथि (जन्म-तिथि) कहलाती है। इसका निर्धारण तिथि के नाम, पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) और चंद्र मास से होता है। हिंदू धर्म में वर्षगांठ (जन्मदिन) तिथि के अनुसार मनाना विशेष फलदायी माना जाता है।

    मेरी जन्म तिथि के अधिदेवता कौन हैं?

    वैदिक ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक तिथि के एक निश्चित अधिदेवता होते हैं—जैसे प्रतिपदा के अग्नि, चतुर्थी के श्रीगणेश, सप्तमी के भगवान सूर्य, एकादशी व द्वादशी के भगवान विष्णु और चतुर्दशी के भगवान शिव। अपनी जन्म तिथि की गणना करने पर आपको अपने अधिदेवता, उनका ध्यान मंत्र और पूजन विधि ज्ञात हो जाएगी।

    मेरा तिथि जन्मदिन हर साल अंग्रेजी कैलेंडर में अलग तारीख पर क्यों आता है?

    हिंदू चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि अंग्रेजी (सौर) वर्ष 365 दिनों का होता है। दोनों कैलेंडरों की गणना पद्धति में अंतर होने के कारण अंग्रेजी कैलेंडर में आपकी जन्म तिथि की तारीख प्रतिवर्ष 10 से 11 दिन पीछे अथवा अधिक मास के प्रभाव से बदलती रहती है।

    क्या जन्म तिथि जानने के लिए जन्म का सही समय होना जरूरी है?

    हाँ, सटीक परिणाम के लिए जन्म का सही समय अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक तिथि 24 घंटे में किसी भी समय समाप्त होकर अगली तिथि प्रारंभ हो सकती है। यदि आपको सटीक समय न पता हो, तो निकटतम अनुमानित समय दर्ज करें और परिणाम को अनुमानित समझें।

    मुझे अपना जन्मदिन अंग्रेजी तारीख पर मनाना चाहिए या जन्म तिथि पर?

    सनातन परंपरा में दोनों का सुंदर समन्वय किया जा सकता है। धार्मिक अनुष्ठान, देव-पूजन, दीपदान, रुद्राभिषेक और बड़ों का आशीर्वाद लेने के लिए अपनी जन्म तिथि को सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि सामाजिक व पारिवारिक उत्सव के लिए अंग्रेजी तारीख का उपयोग किया जा सकता है।

    यदि किसी वर्ष मेरी जन्म तिथि क्षय (गायब) हो जाए तो क्या करें?

    जब कोई तिथि एक सूर्योदय के बाद प्रारंभ होकर अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है, तो उसे 'क्षय तिथि' कहते हैं। ऐसे में धर्मशास्त्रों के नियमानुसार जिस दिन उस तिथि का स्पर्श (व्याप्ति) मुख्य काल में होता है, उसी दिन जन्मोत्सव का पूजन किया जाता है। हमारा कैलकुलेटर इसकी गणना स्वतः सही दिन पर करता है।

    यदि मेरी जन्म तिथि लगातार दो दिन आ जाए (वृद्धि तिथि), तो जन्मोत्सव किस दिन मनाएं?

    जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय को स्पर्श करती है, तो उसे 'वृद्धि तिथि' कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार जन्मोत्सव व मंगल कार्यों के लिए प्रथम दिन को प्राथमिकता दी जाती है। कैलकुलेटर में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

    मेरा जन्म अधिक मास में हुआ था, तो मेरा तिथि जन्मदिन कब मनाया जाएगा?

    अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) लगभग हर तीसरे वर्ष आता है। जिन वर्षों में अधिक मास नहीं होता, उन वर्षों में आपका जन्मदिन उसी नाम के शुद्ध (सामान्य) मास की तिथि को मनाया जाता है। जब अधिक मास पुनः आता है, तब अधिक मास में ही पूजन किया जाता है। कैलकुलेटर इस नियम का स्वतः पालन करता है।

    जन्म तिथि के दिन कौन से शुभ कार्य करने चाहिए?

    जन्म तिथि के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए, कुलदेवता व इष्टदेव का पूजन करना चाहिए, अपनी जन्म तिथि के अधिदेवता के मंत्र का जप करना चाहिए, अन्न, वस्त्र या गौ-सेवा का दान करना चाहिए और माता-पिता व बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करना और किसी भी प्रकार की हिंसा या कटुता से बचना चाहिए।