गणेश चतुर्थी: भगवान गणेश का शुभ जन्मोत्सव
गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। न्यूयॉर्क में मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:36 से दोपहर 2:06।
तारीख
सोमवार, 14 सितंबर 2026
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
गणेश चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:36 – दोपहर 2:06
समय न्यूयॉर्क (40.71° उ., -74.01° पू.), America/New_York के लिए गणना किए गए हैं।
गणेश चतुर्थी पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त दिन का सबसे शुभ काल माना जाता है। मुहूर्तम आपके शहर के अनुसार इसे सटीक खगोलीय गणना से बताता है।
तिथि समय
चतुर्थी शुरू
13 सितंबर 2026 को रात 9:37
चतुर्थी समाप्त
14 सितंबर 2026 को रात 10:14
शुभ और अशुभ समय
शुभ चौघड़िया
ये दिन के शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया पर्व-तिथि और आपके चुने हुए शहर के लिए गणना किए गए हैं।
अमृत
सुबह 6:36 – सुबह 8:10
शुभ
सुबह 9:45 – सुबह 11:19
लाभ
दोपहर 4:01 – शाम 5:35
अमृत
शाम 5:35 – शाम 7:09
चंद्र दर्शन वर्जित समय
गणेश चतुर्थी के दौरान चंद्रमा के दर्शन से मिथ्या दोष लगने की पारंपरिक मान्यता है, जिसका संबंध झूठे आरोप से माना जाता है। नीचे दिए गए स्थान-विशिष्ट समय में चंद्र दर्शन से बचें।
14 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 – 14 सितंबर 2026 को शाम 8:25
गणपति विसर्जन की तिथियाँ
| अवधि | विसर्जन तिथि |
|---|---|
| डेढ़ दिन का विसर्जन | मंगलवार, 15 सितंबर 2026 |
| तीसरे दिन विसर्जन | बुधवार, 16 सितंबर 2026 |
| पाँचवें दिन विसर्जन | शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 |
| सातवें दिन विसर्जन | रविवार, 20 सितंबर 2026 |
| अनंत चतुर्दशी | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 |
गणेश विसर्जन
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है और भगवान गणेश की प्रतिमा का विधिपूर्वक विसर्जन होता है।
गणेश चतुर्थी तिथियाँ: 2026–2030
पंचांग और चौघड़िया देखें
गणेश चतुर्थी क्या है?
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के पावन जन्मोत्सव का पर्व है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि-प्रदाता के रूप में पूजा जाता है।
यह पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है और मुख्य पूजा व स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है।
घर और मंदिरों में मूर्ति स्थापना, मंत्र-जप, आरती, नैवेद्य और सामूहिक भक्ति के साथ उत्सव मनाया जाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
गणेश चतुर्थी शुभारंभ, स्पष्ट विचार और जीवन की बाधाओं को दूर करने का प्रतीक मानी जाती है।
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले गणेश उपासना का भाव इस दिन विशेष रूप से मजबूत होता है।
सांस्कृतिक रूप से यह पर्व पारिवारिक पूजा और सार्वजनिक उत्सव दोनों को जोड़कर सामुदायिक सौहार्द बढ़ाता है।
अनुष्ठान और परंपराएं
- पूजा से पहले घर और वेदी की शुद्धि करके स्थान तैयार करें।
- दिन में मूर्ति स्थापना और परंपरा अनुसार प्राण-प्रतिष्ठा करें।
- दुर्वा, लाल पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें।
- मुख्य पूजा अपने शहर के मध्याह्न मुहूर्त में करें।
- मोदक, लड्डू, फल, नारियल और पंचामृत का नैवेद्य अर्पित करें।
- गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश स्तोत्र या नाम-जप करें।
- आरती, प्रसाद वितरण और विघ्न-निवारण की प्रार्थना के साथ पूजा पूर्ण करें।
पूजा विधि (क्रमबद्ध)
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान सजाएं।
संकल्प लेकर भगवान गणेश का आवाहन करें।
अक्षत, पुष्प, दुर्वा, धूप और दीप क्रमशः अर्पित करें।
मोदक और फल का भोग लगाते हुए गणेश मंत्र जप करें।
मध्याह्न मुहूर्त में मुख्य पूजा और आरती करें।
बुद्धि, स्थिरता और विघ्न-निवारण की प्रार्थना करें।
प्रसाद बांटकर श्रद्धा सहित पूजा पूर्ण करें।
पूजन सामग्री और भोग
गणेश चतुर्थी पर प्रचलित प्रमुख अर्पण और पूजन सामग्री:
- दुर्वा, लाल पुष्प और चंदन
- मोदक, लड्डू, नारियल और मौसमी फल
- पूजा और आरती के लिए घी दीपक और धूप
- गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश स्तोत्र पाठ
- भक्ति भाव से दान और सेवा
- परिवार और समुदाय में प्रसाद वितरण
गणेश पूजा मध्याह्न में क्यों की जाती है?
धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश के प्राकट्य का संबंध मध्याह्न काल से माना गया है। इसलिए मुख्य गणेश चतुर्थी पूजा उस समय करना श्रेष्ठ माना जाता है जब शुक्ल चतुर्थी तिथि आपके स्थान के मध्याह्न काल में उपस्थित हो। ऊपर दिया गया मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय, सौर मध्याह्न, अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र के आधार पर निकाला गया है।
यदि चतुर्थी तिथि दो तारीखों तक रहती है, तो केवल अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख देखकर पर्व का दिन तय नहीं होता। धर्मशास्त्रीय नियम के अनुसार देखा जाता है कि किस दिन मध्याह्न में चतुर्थी का आवश्यक संयोग मिलता है। इसी कारण अलग-अलग शहरों में घड़ी का समय बदलता है और तिथि-सीमा के निकट कभी-कभी पर्व की तारीख भी अलग हो सकती है।
पूजा की तैयारी, वेदी की सजावट और सामग्री पहले से रखी जा सकती है, ताकि संकल्प, प्राण-प्रतिष्ठा और मुख्य उपचार मुहूर्त में शांतिपूर्वक किए जा सकें। परिवार या संप्रदाय की परंपरा अलग हो तो अपने पुरोहित के निर्देश को प्राथमिकता दें। मुहूर्त मुख्य पूजा का मार्गदर्शन है; दिन के अन्य समय में प्रार्थना, जप और आरती करने पर रोक नहीं है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित माना जाता है?
पुराणों में प्रचलित कथा के अनुसार गणेशजी के वाहन के लड़खड़ाने पर चंद्रमा ने उनका उपहास किया। गणेशजी के शाप से इस तिथि पर चंद्र दर्शन को मिथ्या दोष, अर्थात बिना कारण झूठा आरोप लगने की आशंका, से जोड़ा गया। श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि की कथा में भी झूठे संदेह के बाद सत्य सामने आने का प्रसंग इसी परंपरा के साथ स्मरण किया जाता है।
वर्जना पूरे दिन के हर क्षण पर स्वतः लागू नहीं मानी जाती; अपने शहर के लिए ऊपर दिया गया समय देखें। भूलवश चंद्रमा दिख जाए तो घबराने के बजाय गणेशजी का स्मरण, किसी परिचित गणेश मंत्र का जप और स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण करने की परंपरा है। परिवार की रीति के अनुसार पुरोहित कोई विशेष स्तोत्र भी बता सकते हैं।
यह धार्मिक आस्था और व्रत परंपरा का वर्णन है, चंद्रमा के बारे में वैज्ञानिक दावा नहीं। कथा का व्यावहारिक संदेश अहंकार और उपहास से बचना, सत्य पर टिके रहना और निराधार आरोप लगाने से पहले विवेक रखना है।
पूजा के लिए सरल गणेश मंत्र
दीप प्रज्वलित करने और प्रारंभिक उपचार अर्पित करने के बाद मंत्र-जप किया जा सकता है। तेज़ी से अधिक महत्त्व स्पष्ट उच्चारण, एकाग्रता और श्रद्धा का है। आरंभ करने वाले भक्त 11 या 21 बार जप कर सकते हैं; परिवार में निश्चित संख्या हो तो उसी का पालन करें।
पहला मंत्र अध्ययन, यात्रा या किसी शुभ कार्य से पहले विघ्न दूर करने की प्रार्थना है। दूसरा छोटा नाम-मंत्र पूजा, आरती की तैयारी या शांत जप के लिए सरल है। संभव हो तो शुद्ध उच्चारण किसी विश्वसनीय गुरु या पुरोहित से सीखें।
वक्रतुण्ड महाकाय
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
हे वक्रतुण्ड, विशालकाय और करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।
गणपति नाम मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
गं बीजाक्षर के साथ भगवान गणपति को नमस्कार।
अलग-अलग क्षेत्रों के नाम और परंपराएँ
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव घरों और सार्वजनिक मंडलों दोनों में मनाया जाता है। प्रतिदिन आरती, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अंत में विसर्जन यात्रा प्रमुख रूप हैं। परिवार अपनी कुल-परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन गणपति रखते हैं; एक ही अवधि सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे गणेश चतुर्थी या विनायक चविति कहा जाता है। मिट्टी की प्रतिमा, पत्र-पूजा, कडुबु-कुदुमुलु या मोदकम का भोग और सामुदायिक पूजा प्रचलित हैं। भाषा और संप्रदाय के अनुसार विधि बदल सकती है, पर सम्मानपूर्वक स्थापना और विसर्जन से पहले उत्तर-पूजा साझा सूत्र हैं।
गुजरात में भादरवा सुद चौथ के दिन घर, मंदिर और पंडाल में गणेश पूजा की जाती है। मोदक या लड्डू, दूर्वा और लाल फूल सामान्य अर्पण हैं। भोजन के नियम, स्थापना की अवधि और विसर्जन की विधि में स्थानीय परंपरा मानें; विविधता इस जीवंत उत्सव की विशेषता है।
पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमा और घर पर विसर्जन
जहाँ संभव हो बिना रासायनिक रंग वाली प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा चुनें। प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक सजावट और चमकीले रासायनिक रंगों से बचें। फूल, वस्त्र, धातु के आभूषण और पैकिंग को विसर्जन पात्र में डालने के बजाय अलग करें। पुनः उपयोग योग्य सजावट और प्राकृतिक रंगोली से श्रद्धा कम नहीं होती।
छोटी मिट्टी की प्रतिमा का उत्तर-पूजा के बाद साफ बाल्टी या टब में विसर्जन किया जा सकता है। मिट्टी घुलने दें और फिर उसे बगीचे में उपयोग करें या नगर निकाय के निर्देश के अनुसार निस्तारित करें। बिजली की वस्तु, प्लास्टिक या रंगी हुई सामग्री को प्राकृतिक जलाशय में न डालें।
बड़ी प्रतिमा के लिए अधिकृत सामुदायिक या कृत्रिम विसर्जन केंद्र चुनें। स्वीकृत स्थान और संग्रह व्यवस्था शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की नवीन सूचना देखें। 'गणपति बप्पा मोरया' का आनंद नदियों, झीलों, जीव-जंतुओं और सफाई कर्मियों की सुरक्षा के साथ मनाया जा सकता है।
गणेश चतुर्थी से जुड़े सामान्य प्रश्न
गणेश स्थापना का सबसे अच्छा समय क्या है?
मुख्य स्थापना के लिए इस पृष्ठ पर दिया गया आपके शहर का मध्याह्न पूजा मुहूर्त श्रेष्ठ माना जाता है, जब चतुर्थी तिथि मध्याह्न में उपस्थित रहती है। वेदी और सामग्री पहले तैयार रखें, ताकि संकल्प और स्थापना शांतिपूर्वक हो सके।
क्या गणेश स्थापना शाम को कर सकते हैं?
मुख्य स्थापना के लिए मध्याह्न पारंपरिक रूप से प्राथमिक है। संभव न हो तो कोई सामान्य शाम का समय चुनने के बजाय परिवार की परंपरा या विश्वसनीय पुरोहित का मार्गदर्शन लें। पूजा और आरती अन्य समय भी की जा सकती है।
घर में गणपति कितने दिन रखने चाहिए?
डेढ़, तीन, पाँच, सात और दस दिन की अवधि प्रचलित हैं। सभी परिवारों के लिए एक अवधि अनिवार्य नहीं है। अपनी कुल-परंपरा और सुविधा के अनुसार दिन चुनें तथा विसर्जन से पहले विधिपूर्वक उत्तर-पूजा करें।
गलती से चंद्रमा दिख जाए तो क्या करें?
परंपरा में गणेशजी का स्मरण, परिचित गणेश मंत्र का जप और स्यमंतक मणि की कथा सुनना बताया गया है। घबराएँ नहीं; परिवार में प्रचलित उपाय अपनाएँ और कथा के सत्य व विनम्रता के संदेश को याद रखें।
गणेश चतुर्थी व्रत के सामान्य नियम क्या हैं?
स्नान, संकल्प, स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन, पूजा और संयम सामान्य नियम हैं। नशा और कठोर व्यवहार से बचें। बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और रोगी चिकित्सकीय सलाह के बिना कठिन उपवास न करें।
क्या गणेश चतुर्थी सार्वजनिक अवकाश है?
अवकाश देश, राज्य, नियोक्ता और संस्था के अनुसार बदलता है। अपने स्थान की आधिकारिक सरकारी या कार्यस्थल सूची देखें; इस पृष्ठ की पर्व-तिथि अपने आप वैधानिक छुट्टी की पुष्टि नहीं करती।
क्या घर पर गणेश विसर्जन किया जा सकता है?
हाँ, छोटी प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा का उत्तर-पूजा के बाद साफ पात्र में विसर्जन किया जा सकता है। सजावट पहले अलग करें और घुली मिट्टी का निस्तारण स्थानीय नियम के अनुसार करें।
चतुर्थी तिथि दो तारीखों में हो तो पर्व कब मनाएँ?
दिन का चयन चतुर्थी तिथि और स्थानीय मध्याह्न के संयोग से होता है, केवल आधी रात से नहीं। दूसरे शहर का कैलेंडर न अपनाकर अपने शहर के लिए गणना की गई तारीख और मुहूर्त देखें।
