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    जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व

    सटीक तिथि, निशिता काल मुहूर्त और प्रामाणिक पूजा मार्गदर्शन के साथ कृष्ण जन्माष्टमी मनाएं

    पालन परंपरा

    इस शहर के लिए स्मार्त परंपरा दिखाई जा रही है।

    तारीख

    गुरुवार, 3 सितंबर 2026

    निशिता काल मुहूर्त

    4 सितंबर 2026 को रात 12:33

    मुहूर्त समय

    जन्माष्टमी निशिता काल मुहूर्त

    शुरुआत समय: 4 सितंबर 2026 को रात 12:33

    समाप्ति समय: 4 सितंबर 2026 को रात 1:17

    कृष्ण जन्म पूजा का सर्वाधिक शुभ मध्यरात्रि काल, आपके शहर के अनुसार गणना किया गया।

    जन्माष्टमी पालन विवरण

    रोहिणी नक्षत्र

    आरंभ: 3 सितंबर 2026 को दोपहर 2:59

    समाप्त: 4 सितंबर 2026 को दोपहर 1:34

    मध्यरात्रि के समय विद्यमान

    जन्माष्टमी पारण

    इसके बाद व्रत खोलें: 4 सितंबर 2026 को दोपहर 2:44

    अगले सूर्योदय की सीमा 5 सितंबर 2026 को सुबह 6:27 है।

    दही हांडी

    शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

    तिथि समय

    अष्टमी शुरू

    3 सितंबर 2026 को दोपहर 4:55

    अष्टमी समाप्त

    4 सितंबर 2026 को दोपहर 2:44

    पंचांग और चौघड़िया देखें

    जन्माष्टमी के लिए पंचांग देखें जन्माष्टमी के लिए चौघड़िया मुहूर्त देखें

    जन्माष्टमी क्या है?

    जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण के दिव्य जन्म का उत्सव है और हिंदू परंपरा के प्रमुख पर्वों में से एक है।

    यह पर्व श्रावण-भाद्रपद काल की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है और निशिता काल की मध्यरात्रि पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

    भक्त व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन और जप करते हैं, मंदिर व घर सजाते हैं, और मध्यरात्रि में जन्म पूजा व प्रसाद के साथ उत्सव मनाते हैं।

    धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

    जन्माष्टमी धर्म की पुनर्स्थापना और भक्तों की रक्षा हेतु दिव्य चेतना के अवतरण का प्रतीक है।

    भगवान कृष्ण की गीता शिक्षाएं और लीलाएं भक्ति, कर्तव्य, करुणा और आध्यात्मिक विवेक का मार्ग दिखाती हैं।

    सांस्कृतिक रूप से यह पर्व परिवारों और समुदायों को भजन, उपवास, मंदिर पूजा और सामूहिक उत्सव से जोड़ता है।

    अनुष्ठान और परंपराएं

    • प्रातः स्नान करके व्रत संकल्प लें और पूजा स्थान शुद्ध करें।
    • परिवार परंपरा के अनुसार सात्त्विक अनुशासन के साथ व्रत रखें और मंत्र जप करें।
    • कृष्ण विग्रह, झूला और पूजा स्थल को फूल, दीप और रंगोली से सजाएं।
    • दिनभर गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम या कृष्ण स्तोत्र का पाठ करें।
    • मुख्य जन्माष्टमी पूजा अपने शहर के निशिता काल मुहूर्त में करें।
    • बाल गोपाल को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और तुलसी अर्पित करें।
    • मध्यरात्रि आरती, प्रसाद वितरण और परिवार कल्याण प्रार्थना के साथ पूजा पूर्ण करें।

    पूजा विधि (क्रमबद्ध)

    स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शुद्ध पूजा स्थान तैयार करें।

    ध्यान और संकल्प के साथ भगवान कृष्ण का आवाहन करें।

    पुष्प, तुलसी, धूप, दीप और नैवेद्य क्रम से अर्पित करें।

    कृष्ण मंत्र जप करें या गीता/भागवत के चयनित अध्याय पढ़ें।

    निशिता काल में जन्म आरती और बाल कृष्ण झूला सेवा करें।

    माखन-मिश्री, पंचामृत और फल का भोग लगाएं।

    कीर्तन, प्रार्थना और प्रसाद वितरण के साथ विधि पूर्ण करें।

    पारंपरिक अर्पण

    जन्माष्टमी पर प्रचलित प्रमुख अर्पण और उपासना सामग्री:

    • कृष्ण पूजा हेतु तुलसी पत्र, पुष्प और चंदन
    • माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और पंचामृत का भोग
    • दिन और मध्यरात्रि आरती के लिए घी दीपक और धूप
    • गीता पाठ और कृष्ण नाम जप
    • धार्मिक अनुशासन के रूप में दान और अन्नदान
    • परिवार व भक्तों में प्रसाद वितरण

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