करवा चौथ: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों का व्रत
कार्तिक मास का व्रत जो चंद्रोदय पर पूर्ण होता है — विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक निर्जल व्रत रखती हैं, और सटीक चंद्रोदय समय आपके शहर पर निर्भर करता है।
तारीख
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
चंद्रोदय मुहूर्त
No moonrise
तिथि समय
चतुर्थी शुरू
03:37 PM on Oct 29, 2026
चतुर्थी समाप्त
12:40 PM on Oct 29, 2026
पंचांग और चौघड़िया देखें
करवा चौथ क्या है?
करवा चौथ का निर्णायक क्षण चंद्रोदय है। विवाहित स्त्रियाँ चंद्र दर्शन के बाद ही दिन भर का व्रत खोलती हैं, इसलिए सटीक चंद्रोदय समय — जो हर शहर में अलग होता है — वही वह घड़ी है जिसकी ओर पूरा दिन बढ़ता है। यह पृष्ठ आपके चुने हुए शहर के लिए चंद्रोदय समय और शाम का पूजा मुहूर्त देता है।
विवाहित स्त्रियाँ सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को, दीपावली से लगभग नौ दिन पहले मनाए जाने वाले इस व्रत का आरंभ भोर से पहले सरगी से होता है, दिन का केंद्र शाम की करवा चौथ कथा और पूजा है, और व्रत चंद्रोदय पर चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
करवा चौथ दांपत्य प्रेम और पति-पत्नी के बंधन का उत्सव है, जिसमें शिव, पार्वती, गणेश और करवा माता का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
निर्जला व्रत श्रद्धा और संयम की साधना है, जिसे स्त्रियाँ सामूहिक रूप से रखती हैं और संध्या को एकत्र होकर व्रत कथा सुनती व पूजा करती हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि से यह पर्व परिवार को श्रृंगार, मेहंदी, पारंपरिक वस्त्रों और सास-बहू के बीच सरगी व बाया के आदान-प्रदान के साथ जोड़ता है।
अनुष्ठान एवं परंपराएँ
- भोर से पहले उठकर सास द्वारा तैयार की गई सरगी ग्रहण करें और फिर व्रत आरंभ करें।
- दिन भर कुल-परंपरा के अनुसार अन्न-जल त्यागकर कठोर निर्जला व्रत रखें।
- मेहंदी लगाएँ, श्रृंगार और पारंपरिक वस्त्र धारण करें, तथा करवा (मिट्टी का पात्र) और पूजा थाली तैयार करें।
- संध्या को अन्य स्त्रियों के साथ एकत्र होकर करवा चौथ व्रत कथा सुनें और पूजा थाली की फेरी करें।
- शाम को शिव, पार्वती, गणेश और करवा माता की पूजा करें और जल, सिंदूर, पुष्प व मिष्ठान्न अर्पित करें।
- चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें, फिर छलनी से चंद्रमा और उसके बाद पति के दर्शन करें।
- पति द्वारा जल और भोजन का पहला ग्रास ग्रहण कर व्रत खोलें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, सरगी ग्रहण करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।
संध्या को जल से भरा करवा, प्रज्वलित दीप, रोली, अक्षत और नैवेद्य के साथ पूजा स्थान तैयार करें।
पहले भगवान गणेश का आवाहन करें, फिर शिव, पार्वती और करवा माता की पुष्प, सिंदूर व धूप से पूजा करें।
पूजा थाली के साथ करवा चौथ व्रत कथा सुनें या पढ़ें और करवा को देवताओं के सम्मुख रखें।
चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य दें और छलनी से चंद्र दर्शन करें।
उसी छलनी से पति के दर्शन करें, फिर पति द्वारा दिए जल और भोजन से व्रत खोलें।
बड़ों का आशीर्वाद लें और कुल-परंपरा अनुसार प्रसाद व बाया बाँटें।
पारंपरिक भोग एवं सामग्री
करवा चौथ के सामान्य भोग और सामग्री में सम्मिलित हैं:
- जल से भरा टोंटीदार करवा (मिट्टी का पात्र), जो पूजा और चंद्र अर्घ्य का केंद्र है
- पार्वती और करवा माता के लिए सिंदूर, रोली, अक्षत और पुष्प
- व्रत संकल्प के साथ अर्पित फल, मिष्ठान्न और सात्विक नैवेद्य
- सास और बहू के बीच आदान-प्रदान की जाने वाली सरगी और बाया (भोजन व श्रृंगार भेंट)
- घी का दीप, धूप और चंद्र दर्शन के लिए छलनी
- परिवार और बड़ों के साथ बाँटा जाने वाला प्रसाद और दक्षिणा