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    मुफ्त वैदिक जन्म कुंडली – लग्न (D1), नवांश (D9), चंद्र कुंडली व द्रेक्काण (D3)

    सटीक वैदिक जन्म कुंडली तुरंत बनाएं। लग्न (D1), नवांश (D9), चंद्र कुंडली और द्रेक्काण (D3) को उत्तर या दक्षिण भारतीय शैली में देखें—शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित।

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    शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार अपनी वैदिक जन्म कुंडली समझें

    वैदिक ज्योतिष में D1 (राशि/लग्न) के संकेतों को सूक्ष्म करने हेतु वर्ग (विभाजनात्मक) कुंडलियों का उपयोग होता है। इसका वर्णन बृहत पाराशर होरा शास्त्र, जातक पारिजात और फलदीपिका जैसे ग्रंथों में मिलता है। अर्थपूर्ण अध्ययन/फलादेश के लिए सही जन्म समय, स्थान और टाइमज़ोन अत्यंत आवश्यक हैं।

    शास्त्रीय अध्ययन के लिए सरल क्रम

    यदि आप वर्ग कुंडलियों में नए हैं, तो इस क्रम से पढ़ें। इससे संकेत व्यवस्थित रहते हैं और विरोधाभास कम होते हैं।

    1. पहले D1 (लग्न/राशि) देखें
      लग्न, लग्नेश और मुख्य ग्रह स्थितियों से जीवन के व्यापक वचन समझें।
    2. फिर चंद्र लग्न से तुलना करें
      D1 के साथ चंद्र कुंडली की तुलना करके मन, अनुभूति और अनुभवजन्य फल समझें।
    3. D9 (नवांश) से पुष्टि करें
      D9 से गरिमा/स्थायित्व और दीर्घकालिक परिपक्वता की पुष्टि करें—विशेषकर विवाह और धर्म के संदर्भ में।
    4. D3 (द्रेक्काण) से विषय परिष्कृत करें
      D3 को भाई‑बहन, साहस, पहल और ऊर्जा जैसे विषयों के लिए परिष्करण कुंडली की तरह उपयोग करें।

    सटीकता संबंधी नोट्स (महत्वपूर्ण)

    • जन्म समय बहुत महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी त्रुटि से लग्न/भाव बदल सकते हैं।
    • जन्म स्थान के लिए सही टाइमज़ोन (और DST लागू हो तो) अवश्य चुनें।
    • अलग-अलग ऐप्स में अयनांश, हाउस सिस्टम और राहु (Mean/True Node) के कारण अंतर हो सकता है।
    • ये चार्ट शास्त्रीय अध्ययन के लिए सहायक हैं। व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु योग्य आचार्य/ज्योतिषी से परामर्श करें।

    D9/D3 में डिग्री के बारे में

    वर्ग कुंडलियों में मुख्य रूप से राशि-आधारित स्थिति देखी जाती है। इस पेज पर दिखी डिग्री D1 की निरयन (सिडेरियल) देशांतर डिग्री है (डिस्प्ले स्थिरता के लिए), न कि ‘वर्ग डिग्री’ का अलग पुनर्गणन।

    पद्धति व मान्यताएँ

    अन्य सॉफ्टवेयर से तुलना करने के लिए यहाँ प्रयुक्त सेटिंग्स/मान्यताएँ दी गई हैं।

    • राशि: निरयन (Sidereal) राशि, लाहिरी अयनांश के साथ।
    • इफेमेरिस: Swiss Ephemeris; यदि इफेमेरिस फाइल उपलब्ध न हों तो गणना Moshier डेटा पर गिर सकती है।
    • लग्न/भाव (D1): Swiss Ephemeris houses (Placidus ‘P’) से cusp निकाले जाते हैं और फिर अयनांश घटाकर निरयन बनाए जाते हैं।
    • D9/D3 और चंद्र कुंडली: भावों को संदर्भ लग्न (वर्ग लग्न/चंद्र राशि) के सापेक्ष राशि-आधारित माना जाता है।
    • नोड्स: राहु Mean Node के रूप में दिखाया जाता है; केतु 180° विरोध से व्युत्पन्न है। दृष्टियाँ जान-बूझकर नहीं दिखाई जातीं।

    लग्न (D1) कुंडली

    शरीर, व्यक्तित्व और जीवन के व्यापक वचनों की आधारभूत कुंडली। पहले D1 पढ़ें, फिर वर्ग कुंडलियों से पुष्टि और परिष्कार करें।

    नवांश (D9) कुंडली

    ग्रहों की गरिमा/स्थायित्व की पुष्टि करने वाली प्रमुख कुंडली। विवाह, धर्म और दीर्घकालिक फल के लिए विशेष रूप से उपयोगी—जब D1 में संकेत मिश्रित हों।

    चंद्र कुंडली (चंद्र लग्न)

    चंद्र से भाव/गृह पढ़कर मन, अनुभव और भावनात्मक प्रतिक्रिया समझी जाती है। शास्त्रीय पद्धतियों में लग्न और चंद्र दोनों दृष्टि से तुलना करके फलादेश किया जाता है।

    द्रेक्काण (D3) कुंडली

    भाई‑बहन, साहस, पहल और ऊर्जा जैसे विषयों को परिष्कृत करती है। D1 में दिखे समर्थन/प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत ड्राइव के संकेतों को स्पष्ट करने में सहायक।

    हर कुंडली में क्या देखें

    ये शास्त्रीय अध्ययन में उपयोग होने वाले सामान्य (गैर-भविष्यवाणी) चेकपॉइंट्स हैं। इन्हें पढ़ने की गाइड की तरह उपयोग करें।

    D1 (लग्न/राशि): आधार

    • लग्न राशि और लग्नेश की स्थिति (राशि/भाव)।
    • सूर्य और चंद्र की स्थिति (जीवन-शक्ति/मन) को आधार रूप में देखें।
    • मुख्य थीम: बार-बार दिखती राशियाँ और प्रमुख भाव सक्रियता।

    D9 (नवांश): पुष्टि

    • ग्रह गरिमा की पुष्टि (ग्रह मजबूत रहता है या कमजोर होता है?).
    • विवाह/धर्म के संकेतों में स्थायित्व (D1 वचनों की पुष्टि)।
    • समग्र शक्ति: D9 में कितने ग्रह सहायक राशियों में हैं।

    चंद्र कुंडली: अनुभव

    • चंद्र राशि को मन और दृष्टिकोण के संदर्भ के रूप में देखें।
    • लग्न बनाम चंद्र से भावों की तुलना करें (वचन बनाम अनुभूति)।
    • चंद्र के आसपास कौन से ग्रह प्रभाव डालते हैं (निकट/संबंधित स्थिति)।

    D3 (द्रेक्काण): साहस व भाई‑बहन

    • साहस, पहल और प्रयास-क्षमता के संकेत।
    • भाई‑बहन/सहोदर विषय (समर्थन/प्रतिस्पर्धा) को D1 के परिष्कार के रूप में देखें।
    • संगति: क्या D1 और D3 ऊर्जा/ड्राइव के लिए समान दिशा बताते हैं।

    लेजेंड (डिस्प्ले कैसे पढ़ें)

    • उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय शैली में डेटा वही है, सिर्फ लेआउट अलग है।
    • “R” का अर्थ है ग्रह वक्री (Retrograde/Vakra) है।
    • भाव संख्या संदर्भ लग्न (लग्न/चंद्र/वर्ग लग्न) के सापेक्ष निकाली जाती है।
    • राशि चिन्ह 12 राशियों का प्रतीक हैं।

    शब्दावली

    शास्त्रीय संदर्भ

    यह पेज ज्योतिष के पारंपरिक, ग्रंथ-आधारित अध्ययन के अनुरूप बनाया गया है।

    • बृहत पाराशर होरा शास्त्र (BPHS)
    • फलदीपिका
    • जातक पारिजात
    • सरावली

    नोट: अलग-अलग परंपराएँ (परंपरा/परम्परा) अलग तकनीकों पर जोर देती हैं। इस पेज पर हम जान-बूझकर सटीक श्लोक/अध्याय संख्या का दावा नहीं करते।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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